

खनन माफियाओं पर मेहरबान कौन? पुलिस की आंखों के सामने दौड़ रहीं अवैध खनन की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
रामपुर चुंगी से आजाद नगर तक बेखौफ गुजर रहे वाहन, कार्रवाई के नाम पर खामोशी !
रुड़की। अवैध खनन को लेकर शासन और पुलिस मुख्यालय भले ही सख्त रुख अपनाने के दावे कर रहे हों, लेकिन रुड़की में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। रामपुर चुंगी के पास सोलानी नदी का सीना छलनी कर रहे खनन माफिया दिन-रात बेखौफ होकर अवैध खनन में जुटे हैं, जबकि पुलिस सब कुछ देखकर भी अनजान बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सोलानी नदी से निकाली जा रही रेत से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां रामपुर चुंगी, ईदगाह चौक, वैशाली मंडप, आजाद नगर चौक और रामनगर चौक जैसे व्यस्त मार्गों से लगातार गुजर रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इन मार्गों पर पुलिस की मौजूदगी भी रहती है, लेकिन किसी वाहन को रोकने या उसकी जांच करने की जहमत शायद ही कभी उठाई जाती हो। लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर ऐसा कौन-सा “जादू” है, जिसके चलते खनन माफियाओं के वाहन पुलिस की नजरों से बचने के बजाय सीधे पुलिस के सामने से गुजरते हैं और फिर भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। यही वजह है कि अब शहर में यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि आखिर खनन माफियाओं के सिर पर किसका हाथ है? दिन के उजाले में हो रहे अवैध खनन ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर अवैध गतिविधियां रात के अंधेरे में की जाती हैं, लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि खनन माफिया दिनदहाड़े नदी में मशीनें और ट्रैक्टर उतार रहे हैं। इससे साफ है कि उन्हें कार्रवाई का कोई डर नहीं रह गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यदि पुलिस चाहे तो कुछ ही घंटों में इस पूरे नेटवर्क पर लगाम लग सकती है, लेकिन कार्रवाई के अभाव में माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यही कारण है कि अवैध खनन का कारोबार दिन-प्रतिदिन फैलता जा रहा है। खनन माफियाओं की मनमानी केवल नदी और पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचा रही, बल्कि शहरवासियों की जान भी जोखिम में डाल रही है। ओवरलोड और तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मुख्य मार्गों से फर्राटा भर रही हैं। कई बार ये वाहन यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए देखे जाते हैं। ऐसे में किसी भी दिन बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। शहरवासियों का कहना है कि जब तक जिम्मेदार विभाग और पुलिस सख्त कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक अवैध खनन का यह खेल यूं ही चलता रहेगा। अब लोगों की निगाहें प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे खनन माफियाओं पर शिकंजा कसते हैं या फिर सोलानी नदी का सीना इसी तरह छलनी होता रहेगा।