
एसएसपी साहब! खनन माफिया खुलेआम चीर रहें नदी का सीना, रुड़की पुलिस निभा रही धृतराष्ट्र की भूमिका!
लोगों में चर्चा मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद खनन माफियाओं ने अपना तरीका और रूट बदला, पर बंद नहीं किया अवैध खनन
रुड़की। अवैध खनन पर कार्रवाई के बड़े-बड़े दावों के बीच रामपुर क्षेत्र के पास बहने वाली सोलानी नदी में खनन माफियाओं का साम्राज्य लगातार फैलता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि दिन-रात नदी का सीना छलनी कर खनिज निकाला जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और पुलिस मानो धृतराष्ट्र की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बाद खनन माफियाओं ने अपना तरीका और रास्ते जरूर बदल लिए, लेकिन अवैध कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले खनिज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां एक निश्चित मार्ग से गुजरती थीं, लेकिन खबरें सामने आने के बाद माफियाओं ने गांवों के संपर्क मार्गों और वैकल्पिक रास्तों को अपना नया ठिकाना बना लिया। अब रात के अंधेरे में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां धड़ल्ले से दौड़ रही हैं और अवैध खनिज को गंतव्य तक पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, शाम ढलते ही सोलानी नदी में खनन का खेल शुरू हो जाता है, जो सुबह तक चलता रहता है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों की नींद हराम हो चुकी है। वहीं भारी वाहनों के कारण गांव की सड़कें भी टूट-फूट का शिकार हो रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब खनिज से भरे वाहन खुलेआम सड़कों पर दौड़ रहे हैं तो क्या पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं?
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है। यही कारण है कि मीडिया की खबरों के बावजूद अवैध खनन पहले की तरह जारी है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब रास्ते बदल गए हैं और खेल पहले से अधिक सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा है।
पर्यावरण प्रेमियों ने भी इस पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सोलानी नदी में लगातार हो रहा अवैध खनन आने वाले समय में गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा कर सकता है। वहीं, अब लोगों की निगाहें जिले के एसएसपी और प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर कब तक खनन माफिया सोलानी नदी का सीना चीरते रहेंगे और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने रहेंगे? यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध खनन का यह खेल प्रशासनिक दावों की पोल खोलता रहेगा और खनन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जाएंगे।