मुफ्ती रियासत ने कहा कि मदरसा दारुल उलूम देवबंद ने हमेशा भाईचारे और आपसी सौहार्द का पैगाम दिया है - IBN7INDIA

मुफ्ती रियासत ने कहा कि मदरसा दारुल उलूम देवबंद ने हमेशा भाईचारे और आपसी सौहार्द का पैगाम दिया है

रुड़की के लंढौरा के सबसे बड़े इमदादुल इस्लाम अरबी मदरसे में पहुंचे उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने कहा कि मुसलमान आज अपने आमाल की वजह से परेशान है मुसलमानों को अल्लाह के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। इस देश और इस प्रदेश की भूमि से मोहब्बत करिए जब आप ईमानदार होंगे तो परिवार की भी तरक्की होगी और बच्चों की भी तरक्की होगी।उन्होंने कहा कि अरबी मदरसों के कुछ लोग मदरसों की मान्यता लेने के लिए झिझक रहे हैं या डर रहे हैं कि कहीं मान्यता लेने के बाद मदरसे सरकारी ना हो जायें।ऐसा कुछ भी नहीं है प्रदेश की धामी सरकार ने मदरसों को बेहतर बनाने के लिए मदरसा बोर्ड से पंजीकृत कराने का निर्णय लिया है अब मदरसों में एन सी आर टी की पढ़ाई होगी जिससे मदरसे के छात्रों को सभी विषयों की जानकारी होगी।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मदरसों में पढ़ रहे छात्र छात्राओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना चाहते हैं।वह इसके लिए मुख्यमंत्री के बेहद आभारी हैं। उन्होंने कहा कि अरबी मदरसों के सभी हालात ठीक होंगे और सभी मसाइल को जल्द से जल्द हल किया जायेगा।
इस मौके पर इमदादुल इस्लाम मदरसे के नाजिम मुफ्ती रियासत ने कहा कि मदरसों के खिलाफ एक माहौल बनाया जा रहा है जबकि अरबी मदरसे हिंदी अंग्रेजी और उर्दू आदि की तालीम काफी बेहतर तरीके से दे रहे हैं। मदरसे के छात्रों को अपने देश की मोहब्बत सिखाई जाती है अरबी मदरसों ने आजादी की जंग में भी अहम योगदान दिया है । हालांकि आज तक भी इस्लामिक मदरसों में ना तो दहशतगर्दी मिली है और ना ही दहशतगर्दी सिखाई जाती है।मदरसों और मस्जिदों से शांति और भाईचारे का पैगाम जाता है।मुफ्ती रियासत ने कहा कि मदरसा दारुल उलूम देवबंद ने हमेशा भाईचारे और आपसी सौहार्द का पैगाम दिया है उसी पैगाम को अरबी मदरसे आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष से जल्द से जल्द सभी मदरसों को मान्यता देने की अपील भी की है।
एडवोकेट अब्दुल शमी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने भी मदरसों को आधुनिक तालीम से जोड़ने की कोशिश की थी जिसका नाम एस पी क्यू एम था। जिसके लिए अध्यापक की मदरसों में नियुक्ति भी हुई।मदरसा बोर्ड ने भी कई योजनाएं चलाई लेकिन पिछले सात आठ साल से इस योजना ने दम तोड़ दिया जो आज तक नहीं चल पाई है। उत्तराखंड मदरसा बोर्ड की जो डिग्री हैं आलिम फाजिल जब सरकारी दफ्तरों में जाता है तब उनकी कोई हैसियत नहीं होती उन्हें माना नहीं जाता यहां तक कि पासपोर्ट भी ऐसी डिग्रियों से नहीं बनता है।लेकिन यूपी सरकार ठीक कार्य हो रहा है मदरसों को मान्यता दी जा रही है उत्तराखंड में भी अरबी मदरसों की औपचारिकताओं को कम करना चाहिए ताकि मदरसे वालों को कुछ राहत मिल सके।इस मौके पर लंढौरा नगर पंचायत के चेयरमैन डॉ मोहम्मद नसीम ने कहा कि अरबी मदरसों में आज के समय में बेहतर तालीम दी जा रही है जिन मदरसों में सील लगाने की कार्रवाई हुई हैं उन्हें जल्द से जल्द खोला जाए ताकि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित ना हो सके।इस मौके पर कार्यक्रम का संचालन मुफ्ती इकराम ने किया।इस मौके पर मौलाना नवाब अली, कारी युनुस, के अलावा बड़ी संख्या में उलेमाये इकराम मौजूद रहे।

Exit mobile version