सिविल अस्पताल पुलिस चौकी पर चलेगा बुलडोजर! डीएम के आदेश के बाद ध्वस्तीकरण की तैयारी तेज

सिविल अस्पताल परिसर में स्थित जर्जर पुलिस चौकी समेत मातृ एवं शिशु टीकाकरण केंद्र, अस्पताल मेस और सीएमएस के पुराने आवास के आवास भी होंगे जद में

पुराने भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद उसी स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए भवनों का कराया जाएगा निर्माण

रुड़की। वर्षों से खस्ताहाल और जर्जर अवस्था में खड़े सिविल अस्पताल के कई पुराने भवन अब जल्द ही इतिहास बन जाएंगे। जिलाधिकारी के निर्देश पर सिविल अस्पताल परिसर में स्थित जर्जर पुलिस चौकी, मातृ एवं शिशु टीकाकरण केंद्र, अस्पताल मेस तथा सीएमएस के पुराने आवास को ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। अस्पताल प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को लेकर आवश्यक कार्रवाई तेज कर दी है।
दरअसल, कुछ दिन पूर्व जिलाधिकारी ने सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में कई भवन अत्यंत जर्जर हालत में पाए गए थे। भवनों की दीवारों में दरारें, उखड़ता प्लास्टर और कमजोर हो चुकी छतें किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने इन भवनों को तत्काल ध्वस्त करने के आदेश जारी किए थे। सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. अरविंद मिश्रा ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेशों के अनुपालन में ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन भवनों को गिराया जाना है, वे काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं। सुरक्षा की दृष्टि से उनका हटाया जाना आवश्यक है ताकि मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मियों को किसी प्रकार का खतरा न रहे। अस्पताल परिसर में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इन जर्जर भवनों के आसपास लोगों की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मचारियों ने भी लंबे समय से इन भवनों को हटाने की मांग उठाई थी। बरसात के मौसम में भवनों के और अधिक कमजोर होने की आशंका जताई जा रही थी।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पुराने भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद उसी स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा। इससे अस्पताल की व्यवस्थाएं और बेहतर होंगी तथा मरीजों को अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
फिलहाल ध्वस्तीकरण की खबर से अस्पताल परिसर में चर्चा का माहौल है। लोगों का मानना है कि प्रशासन का यह कदम संभावित हादसों को रोकने और अस्पताल के कायाकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

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