रुड़की की वायर निर्माण इकाई पर राज्य कर विभाग का शिकंजा, फर्जी बिलों से जीएसटी चोरी का खुलासा

केंद्रीयकृत अन्वेषण इकाई की जांच में सामने आई बड़ी कर अनियमितता, दस्तावेजों की गहन पड़ताल

बिना माल खरीदे इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने का आरोप, विभाग जुटा कर चोरी का पूरा हिसाब लगाने में

रुड़की। राज्य कर विभाग की केंद्रीयकृत अन्वेषण इकाई ने जीएसटी चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए रुड़की स्थित एक इलेक्ट्रिकल वायर एवं पैनल निर्माण इकाई पर जांच कार्रवाई की है। आयुक्त कर उत्तराखंड प्रतीक जैन के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में फर्म द्वारा फर्जी बिलों के जरिए कर चोरी किए जाने के प्राथमिक प्रमाण मिले हैं। विभाग अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कर कर चोरी की वास्तविक राशि का आकलन करने में जुटा है। जांच के दौरान अधिकारियों ने फर्म के जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल, ई-इनवॉइस समेत अन्य वित्तीय दस्तावेजों का गहन विश्लेषण किया। विभाग को पहले से संदेह था कि फर्म लगातार कारोबार तो दर्शा रही है, लेकिन उसके अनुरूप सरकार के खाते में जीएसटी जमा नहीं किया जा रहा था। इसी आधार पर केंद्रीयकृत अन्वेषण इकाई ने जांच शुरू की।
जांच में एमसीए पोर्टल और अन्य स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं का मिलान किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फर्म ने वास्तविक माल की खरीद किए बिना फर्जी खरीद दर्शाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लिया। इससे कर देनदारी को कृत्रिम रूप से कम दिखाया गया और सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया।
राज्य कर विभाग के अधिकारियों के अनुसार मामले में सभी दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यदि जांच में कर चोरी की पुष्टि होती है तो संबंधित फर्म के खिलाफ जीएसटी अधिनियम के तहत वसूली, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि कर चोरी और फर्जी बिलिंग के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ऐसी अनियमितताओं में शामिल कारोबारियों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि कर व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जा सके और सरकारी राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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