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इलाज न मिलने के कारण परिजनों के सामने व्यक्ति ने अस्पताल की चौखट पर ही तोड़ा दम, परिजनों का आरोप समय रहते मिल जाता इलाज़ तो बच सकती थी जान।

इलाज न मिलने के कारण परिजनों के सामने व्यक्ति ने अस्पताल की चौखट पर ही तोड़ा दम, परिजनों का आरोप समय रहते मिल जाता इलाज़ तो बच सकती थी जान।

उत्तराखंड के रूड़की के सिविल अस्पताल ने सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े दावो की पोल खोलकर रख दी है। हमारे देश में जहां डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है वहीं ये भगवान अब तनख्वा तो मोटी मोटी लेते है लेकिन इंसानों की ज़िंदगीया इनके लिए बहुत मामूली चीज हो गई है। यह हमारा कोई भ्रम नही बल्कि रूड़की के सरकारी अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति ने डॉक्टरों के इंतजार में अस्पताल की चोखट पर ही दम तोड दिया। यह मानवता को शर्मशार करता दिल को झकझोर देने वाला मामला दो दिन पहले का बताया जा रहा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रुड़की सिविल अस्पताल में बढ़ेडी राजपूतान के कुछ लोग अपने मरीज को लेकर दवाई दिलाने आए थे। जहां अस्पताल की चोखट पर ही डॉक्टरों का इंतजार करते हुए एक बुजुर्ग व्यक्ति ने दम तोड दिया।

परिजनों का कहना है कि हम अपने मरीज को लेकर रुड़की सिविल हॉस्पिटल आए थे हम लोग कोशिश कर रहे थे कि हमारे मरीज को कोई भर्ती कर ले, लेकिन पहले तो इस अस्पताल में पर्ची की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। हम लोगों के द्वारा पर्ची बनवाने के बाद भी लगातार ऊपर नीचे के चक्कर लगाने पड़े लेकिन फिर भी हमारे मरीज को किसी ने भर्ती करने की जहमत तक नहीं की। हम लोगों को कहा गया कि दोपहर 12 बजे के बाद डॉक्टर साहब आएंगे फिर भर्ती होगा। हम लोगो को अस्पताल में आए हुए दो से ढाई घंटे का समय हो गया है लेकिन हमारे मरीज को किसी ने भर्ती नहीं किया। अब उनकी जान चली गई है। जान जाने के बाद भी 20 से 30 मिनट का समय गुजर गया लेकिन अभी तक भी कोई अस्पताल से कर्मचारी हम लोगों की मदद के लिए नही पहुंचा।

अस्पताल की चोखट पर मृत पड़े हुए व्यक्ति की वीडियो बनता देख अस्पताल का एक कर्मचारी आया और कहने लगा आप वीडियो नहीं बना सकते। उसके बाद वह अपने साथ कुछ पुलिस कर्मियों को लेकर आया और वहां पर पड़े उस मृतक व्यक्ति को स्ट्रेचर पर डालकर ले गए। आपको बता दे पूरे अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं लेकिन अस्पताल की मुख्य चोखट पर मृत पड़ा व्यक्ति अस्पताल के किसी डॉक्टर या कर्मचारी कोको भी दिखाई नही दिया। इससे अंदाजा लगा सकते हैं रुड़की सिविल अस्पताल के डॉक्टर और अधिकारी मरीजों के प्रति कितना गंभीर है।

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