📅 मंगलवार, 25 अगस्त 2026 हमारे बारे में संपर्क करें
IBN7 INDIA
🔴 ब्रेकिंग
सिविल लाइंस में नजूल भूमि पर हो रहे निर्माणों पर उठे सवाल कैंप में आसान नक्शा पास कराने के दावे, दफ्तर पहुंचते ही व्यवस्था के अलग रंग! तालाब किनारे सहबान को गोली मारकर भागा हमलावर, गांव में मचा हड़कंप रुड़की में डबल मर्डर से मचा हड़कंप, दो सगी बहनों की गोली मारकर हत्या खबर का असर: नींद से जागा जल संस्थान, चंद घंटों में गड्ढे भरने पहुंची जेसीबी बीटी गंज मुख्य चौराहे पर खुले गड्ढे बने हादसों का कारण तेज बहाव में बह रहे 24 वर्षीय जायरीन को आपदा राहत दल ने सकुशल बचाया गौकशी के मामले में पांच वांछित आरोपी गिरफ्तार

कैंप में आसान नक्शा पास कराने के दावे, दफ्तर पहुंचते ही व्यवस्था के अलग रंग!

✍️ IBN7 INDIA डेस्क 🗓 25 अगस्त 2026 (2 घंटे पहले) 👁 7 बार पढ़ा गया
साझा करें: WhatsApp Facebook X
विज्ञापनविज्ञापन
कैंप में आसान नक्शा पास कराने के दावे, दफ्तर पहुंचते ही व्यवस्था के अलग रंग!

एचआरडीए के ‘सरल सिस्टम’ पर सवाल! आम आदमी फाइल लेकर भटक रहा, सूत्रों के अनुसार कथित आर्किटेक्टों की फाइलें रफ्तार पकड़ने की चर्चा!

कैंप में आसान नक्शा पास कराने के दावे, दफ्तर पहुंचते ही व्यवस्था के अलग रंग!

सुबह से शाम तक कथित आर्किटेक्टों का डेरा, अधिकारियों-कर्मचारियों से नजदीकी पर उठे सवाल

रुड़की। रुड़की-हरिद्वार विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की ओर से आम लोगों के लिए नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण कार्यालय में सामने आ रही शिकायतों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि एक तरफ आम आदमी अपने घर या व्यावसायिक भवन का नक्शा पास कराने के लिए फाइल लेकर बार-बार एचआरडीए के चक्कर काट रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ कथित आर्किटेक्ट सुबह से शाम तक कार्यालय में डेरा डाले नजर आते हैं। पिछले दिनों एचआरडीए की ओर से अलग-अलग स्थानों पर कैंप लगाए गए थे। इन कैंपों में अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया था कि नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है और लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कैंपों में लोगों को आवासीय भवनों के नक्शे और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि व्यवस्था वास्तव में आसान होगी।

*आम आदमी लाइन में, कथित आर्किटेक्ट ‘इनसाइड ट्रैक’ पर?*

स्थानीय लोगों का आरोप है कि वास्तविकता कुछ अलग दिखाई दे रही है। कई आवेदक अपने घरेलू और कमर्शियल भवनों के नक्शे पास कराने के लिए लगातार कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उन्हें कभी दस्तावेज तो कभी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं आरोप है कि कुछ कथित आर्किटेक्ट अधिकारियों और कर्मचारियों से लगातार संपर्क में रहते हैं और उनके माध्यम से आने वाली फाइलों की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ती है। कुछ लोगों ने तो अधिकारियों-कर्मचारियों और कथित आर्किटेक्टों के बीच मिलीभगत के गंभीर आरोप तक लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि अब एचआरडीए की कार्यप्रणाली और फाइलों के निस्तारण की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

*‘ सरल व्यवस्था’ का असली टेस्ट आम आदमी की फाइल से**

लोगों का कहना है कि यदि एचआरडीए वास्तव में आम आदमी के लिए व्यवस्था सरल बना रहा है तो इसका फायदा सीधे आवेदकों को दिखाई देना चाहिए। नक्शा पास कराने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, फीस और फाइल निस्तारण की समयसीमा स्पष्ट रूप से सार्वजनिक होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि एचआरडीए कार्यालय में लगातार सक्रिय रहने वाले कथित आर्किटेक्टों की भूमिका और फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि कहीं किसी आवेदक को आर्किटेक्ट के माध्यम से फाइल लगाने के लिए मजबूर तो नहीं किया जा रहा। लोगों का कहना है कि कैंप में आसान व्यवस्था के दावे तभी सार्थक होंगे, जब एचआरडीए के दरवाजे पर पहुंचने के बाद आम आदमी को भी वही रफ्तार और सुविधा मिले, जो कथित तौर पर प्रभावशाली लोगों को मिलती दिखाई दे रही है।