बेशकीमती फैंसी खंभों से लाइटें गायब, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

एचआरडीए के बेशकीमती फैंसी खंभों से लाइटें गायब, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
रुड़की। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की ओर से विकसित कराई गई एक अप्रूव्ड कॉलोनी के बाहर लगाए गए फैंसी बिजली के खंभों से लाइटें गायब होने का मामला सामने आया है। लाखों रुपये की लागत से लगाए गए खंभे मौके पर मौजूद हैं, लेकिन उन पर लगी आकर्षक फैंसी लाइटें अब दिखाई नहीं दे रही हैं। लाइटें किस परिस्थिति में गायब हुईं, इसका अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। मामले के सामने आने के बाद विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, रुड़की से मंगलौर की ओर जाने वाली नहर पटरी पर एचआरडीए से अप्रूव्ड एक कॉलोनी विकसित कराई गई है। कॉलोनी के बाहर सड़क और चौराहे के सौंदर्यीकरण के उद्देश्य से लाखों रुपये की लागत से फैंसी बिजली के खंभे लगाए गए थे। इन खंभों पर आकर्षक लाइटें लगाई गई थीं, जिससे रात के समय सड़क और आसपास का क्षेत्र रोशन रहने के साथ ही इसकी खूबसूरती भी बढ़ सके।
हालांकि, अब मौके पर खंभे तो खड़े हैं, लेकिन उन पर लगी फैंसी लाइटें नजर नहीं आ रही हैं। लाइटें कब और किन परिस्थितियों में गायब हुईं, उन्हें किसने हटाया और इसके पीछे क्या कारण रहा, इन सवालों के जवाब फिलहाल सामने नहीं आए हैं।
मामला एचआरडीए के अधिकारी प्रभात कुमार के संज्ञान में भी आया है। उन्होंने बताया कि फैंसी लाइटें गायब होने का मामला उनके संज्ञान में है। उनके स्तर से पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और लाइटें गायब होने के कारणों का पता लगाया जाएगा। जांच में यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि संभावित ठेकेदार से भी बातचीत की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर खंभों पर दोबारा नई फैंसी लाइटें लगवाने की कार्रवाई की जाएगी।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल
फैंसी लाइटों के गायब होने के बाद एचआरडीए की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। लाखों रुपये की लागत से लगाए गए खंभों और लाइटों की देखरेख किस स्तर पर की जा रही थी और लाइटें गायब होने की जानकारी विभाग को कब मिली, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल विभागीय जांच के बाद ही पता चलेगा कि फैंसी लाइटें किन परिस्थितियों में गायब हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।




