स्विफ्ट कार की चेकिंग में खुला करोड़ों की डिजिटल मनी ट्रेल का राज, ‘मगध साइबर गैंग’ के पांच आरोपी गिरफ्तार

स्विफ्ट कार की चेकिंग में खुला करोड़ों की डिजिटल मनी ट्रेल का राज, ‘मगध साइबर गैंग’ के पांच आरोपी गिरफ्तार
रुड़की/हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के साइबर क्राइम हॉटस्पॉट अभियान के तहत हरिद्वार पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नालंदा और नवादा, बिहार से जुड़े कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। श्यामपुर पुलिस ने संदिग्ध स्विफ्ट कार की चेकिंग के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से 35 एटीएम/डेबिट कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 37,500 रुपये की नकदी बरामद हुई है। पुलिस के प्रारंभिक डिजिटल और बैंकिंग विश्लेषण में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिलने की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय देहरादून द्वारा साइबर अपराध के हॉटस्पॉट और संभावित हॉटस्पॉट को चिह्नित कर प्रभावी कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में एसएसपी हरिद्वार के निर्देशन में श्यामपुर पुलिस की टीम क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की लगातार चेकिंग कर रही थी।
स्विफ्ट कार की चेकिंग में खुला नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, 25-26 अगस्त 2026 की रात टीम शांति व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और संदिग्ध व्यक्ति एवं वाहन चेकिंग के लिए गश्त कर रही थी। इसी दौरान सज्जनपुर पीली क्षेत्र में मुखबिर से सूचना मिली कि सफेद रंग की स्विफ्ट कार में कुछ लोग साइबर फ्रॉड से जुड़े हैं।
सूचना पर पुलिस टीम ने रसियाबड़ सिंगल लाइन प्वाइंट पर चेकिंग शुरू की। कुछ देर बाद चिड़ियापुर की ओर से आ रही स्विफ्ट कार संख्या UK-08AF-0560 को रोककर तलाशी ली गई। कार में सवार पांच लोगों और वाहन की तलाशी के दौरान एक पिठ्ठू बैग से बड़ी संख्या में एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप और नकदी बरामद हुई।
एक बैग में मिला साइबर फ्रॉड का सामान
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से बरामद सामान में:
35 एटीएम/डेबिट कार्ड
14 बैंक पासबुक
17 मोबाइल सिम कार्ड
18 मोबाइल फोन
2 लैपटॉप
1 लैपटॉप चार्जर
10 एटीएम कवर
पैन कार्ड
37,500 रुपये नकद
शामिल हैं।
कई बैंकों के खातों से जुड़ा नेटवर्क
बरामद पासबुकों में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन बैंक और द नैनीताल बैंक समेत विभिन्न बैंकों के खाते मिले हैं। पुलिस के अनुसार इनमें ऋषिकेश, हरिद्वार, कनखल, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों से संबंधित खातों की जानकारी सामने आई है।
वहीं, बरामद एटीएम/डेबिट कार्ड में यूनियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, नैनीताल बैंक, केनरा बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, सिटी यूनियन बैंक और एचडीएफसी बैंक समेत कई बैंकों के कार्ड पाए गए हैं।
व्हाट्सऐप चैट से मिले अहम सुराग
पुलिस के प्रारंभिक परीक्षण में आरोपियों के मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट, बैंक खाता नंबर, खाताधारकों के नाम, क्यूआर कोड और लेन-देन से संबंधित बातचीत के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। मोबाइल की गैलरी में विभिन्न बैंक पासबुक और खातों से संबंधित दस्तावेजों की तस्वीरें भी मिली हैं।
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक बैंकिंग और डिजिटल विश्लेषण में 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेन-देन के सुराग मिले हैं। हालांकि वास्तविक साइबर अपराध की रकम और पूरी मनी ट्रेल का पता विस्तृत बैंक स्टेटमेंट, केवाईसी, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
म्यूल खातों से एटीएम तक पहुंचती थी रकम
पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि आरोपी स्थानीय लोगों से बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम हासिल करते थे। इन खातों के एटीएम पिन और यूपीआई आईडी का एक्सेस अपने पास रखते थे। साइबर फ्रॉड की रकम म्यूल खातों में आने के बाद उसे यूपीआई और अन्य बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद एटीएम या सीडीएम से नकदी निकालकर रकम को कमीशन के आधार पर बांटा जाता था।
पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों से लेकर साइबर फ्रॉड की रकम निकालने वालों तक फैला हुआ था। नालंदा और नवादा, बिहार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पांच आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
कृष्णा पांडे, उम्र 24 वर्ष, निवासी नालंदा, बिहार
निरंजन कुमार, उम्र 24 वर्ष, निवासी नवादा, बिहार
सन्नी, उम्र 21 वर्ष, निवासी हरिद्वार
चंद्रमणि कुमार, उम्र 24 वर्ष, निवासी नवादा, बिहार
चंदन पांडे, उम्र 20 वर्ष, निवासी हरिद्वार
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
इन धाराओं में कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 318(4), 317(2), 3(5) बीएनएस तथा धारा 66सी और 66डी आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की है। बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप का विस्तृत डिजिटल परीक्षण न्यायालय की अनुमति के बाद कराया जाएगा। बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर म्यूल अकाउंट धारकों, अन्य साइबर अपराधियों और नेटवर्क के मुख्य संचालकों की पहचान की जा रही है।
एसएसपी हरिद्वार ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है और पुलिस की टीमें इस नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए काम कर रही हैं।
पुलिस टीम
कार्रवाई में एसपी सिटी अभय सिंह, सीओ सिटी शिशुपाल नेगी, सीओ साइबर क्राइम/भगवानपुर सुमित पांडे, थानाध्यक्ष नितेश शर्मा, एसएसआई मनोज रावत, एसआई देवेंद्र तोमर, एसआई मोहन कठैत, एसआई गगन मैठाणी, एएसआई रविंद्र गौड़, एएसआई देवेंद्र यादव, हेड कांस्टेबल नरेंद्र सिंह नेगी, हेड कांस्टेबल 392 प्रमोद कुमार सहित कोतवाली श्यामपुर, साइबर क्राइम हरिद्वार, एसओजी और पुलिस टीम के अन्य जवान शामिल रहे।




