रुड़की में पानी की बोतलों और कोल्ड ड्रिंक पर जमकर हो रही ओवररेटिंग

रुड़की में पानी की बोतलों और कोल्ड ड्रिंक पर जमकर हो रही ओवररेटिंग
एमआरपी से अधिक वसूली कर रहे ढाबा और रेस्टोरेंट संचालक, ग्राहकों की जेब पर पड़ रही अतिरिक्त मार
शिकायत के बावजूद जिम्मेदार विभाग के अधिकारी बने मूकदर्शक, मुनाफाखोरों पर कार्रवाई के दावों की खुल रही पोल
रुड़की। रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में मुनाफाखोरी का खेल अब पीने के पानी और कोल्ड ड्रिंक तक पहुंच गया है। ढाबों और रेस्टोरेंट में ग्राहकों से पानी की बोतलों और कोल्ड ड्रिंक पर निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक पैसे वसूले जाने के मामले सामने आ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि बोतलों पर बाकायदा कीमत अंकित होने के बावजूद ग्राहकों से मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में 15 रुपये एमआरपी वाली पानी की बोतल और 30 रुपये एमआरपी वाली कोल्ड ड्रिंक के लिए ग्राहकों से निर्धारित कीमत से अधिक रकम मांगी जा रही है। ढाबों और रेस्टोरेंट में खाना खाने के लिए रुकने वाले लोगों को जब पानी की बोतल या कोल्ड ड्रिंक दी जाती है, तो उनसे एमआरपी से अधिक पैसे वसूले जाते हैं। जब ग्राहक इस पर सवाल उठाते हैं और बोतल पर लिखी कीमत का हवाला देते हैं, तो उन्हें कथित तौर पर साफ जवाब दिया जाता है कि उन्हें तय की गई अतिरिक्त रकम चुकानी ही होगी।
बताया जा रहा है कि ढाबों और रेस्टोरेंट में आने वाले अधिकांश ग्राहक बाहरी क्षेत्रों से होते हैं। ऐसे में वे अक्सर विवाद से बचने के लिए अतिरिक्त पैसे देकर वहां से चले जाते हैं। इसी का फायदा उठाकर कुछ ढाबा और रेस्टोरेंट संचालक अपनी मनमानी कर रहे हैं। ग्राहकों के सामने एमआरपी का कोई महत्व नहीं रह जाता और खुलेआम उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
वहीं, हरिद्वार जिले में संबंधित विभागों की ओर से समय-समय पर ओवररेटिंग और मुनाफाखोरी पर अंकुश लगाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यदि निर्धारित कीमत से अधिक वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? क्या विभागीय अधिकारियों को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है या फिर इन पर प्रभावी कार्रवाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है?
पीने के पानी जैसी आवश्यक वस्तु पर भी ग्राहकों से निर्धारित कीमत से अधिक रकम वसूले जाने के आरोप गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर ओवररेटिंग करने वाले ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर मुनाफाखोरी का यह खेल इसी तरह जारी रहता है।




