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पहाड़ों में उतरे आचार्य बालकृष्ण, किसानों के लिए तलाश रहे खेती की नई राह

✍️ IBN7 INDIA डेस्क 🗓 14 अक्टूबर 2026 (9 घंटे पहले) 👁 4 बार पढ़ा गया
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पहाड़ों में उतरे आचार्य बालकृष्ण, किसानों के लिए तलाश रहे खेती की नई राह

नवरात्रि अनुष्ठान के बीच दुर्गम पहाड़ों में उतरे आचार्य बालकृष्ण, किसानों के लिए तलाश रहे खेती की नई राह

मालागांव के श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड में 40 प्रजातियों की 100 से अधिक किस्मों पर प्रयोग
औषधीय पौधों और फलदार वृक्षों के जरिए पहाड़ों में आजीविका के नए अवसर विकसित करने की पहल

‘बिफोर एंड आफ्टर’ सीरीज के जरिए दुर्गम जमीन को उपयोगी बनाने के प्रयासों और बदलावों को किया जाएगा दर्ज

हरिद्वार, रुड़की। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण नवरात्रि के नौ दिवसीय अनुष्ठान के बीच उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में खेती की संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित मालागांव के श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड में अनुष्ठान के लिए पहुंचे आचार्य बालकृष्ण अपने सहयोगियों के साथ नुकीले पत्थरों, कंटीली झाड़ियों और मलबे से भरे दुर्गम रास्तों पर पहुंचे। यहां रास्तों को सुगम बनाने, जमीन को खेती योग्य बनाने, औषधीय पौधे लगाने और पहाड़ के किसानों के लिए आजीविका के नए विकल्प तलाशने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
आचार्य बालकृष्ण ने कहा, “जब तक पथरीले मार्ग पर हम स्वयं नहीं चलेंगे, तब तक वहां सुगम रास्ता बनाने की संभावनाओं को नहीं ढूंढ सकते।” उन्होंने इस पहल को ‘बिफोर एंड आफ्टर’ सीरीज के रूप में दर्ज करने की बात कही। इसके माध्यम से काम शुरू होने से पहले और बाद की स्थिति को सामने लाकर दुर्गम जमीन को उपयोगी बनाने में आने वाली चुनौतियों और उससे होने वाले बदलावों को प्रदर्शित किया जाएगा।
40 प्रजातियों की 100 से अधिक किस्मों पर प्रयोग
मालागांव स्थित श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड में समुद्र तल से करीब साढ़े तीन से चार हजार फीट की ऊंचाई पर विभिन्न फलदार वृक्षों और औषधीय पौधों की खेती की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, यहां लगभग 40 प्रजातियों की 100 से अधिक किस्मों के पौधे लगाए गए हैं।
इनमें आम, अमरूद, शहतूत, अंजीर, कटहल, आड़ू, खुबानी, चीकू और इमली जैसे फलदार वृक्षों के साथ नींबू, माल्टा, संतरा, अनार, लेमनग्रास, हल्दी और सर्पगंधा जैसे पौधे शामिल हैं। इसके अलावा ड्रैगन फ्रूट की खेती और मिश्रित फसल यानी इंटरक्रॉपिंग की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।
इस प्रयोग का उद्देश्य पहाड़ी जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल पौधों की पहचान करना है, ताकि किसान इन प्रयोगों से मिले अनुभव के आधार पर अपने खेतों के लिए उपयुक्त विकल्प चुन सकें। इससे उन्हें नई फसलों की खेती शुरू करने से पहले उनकी संभावनाओं और शुरुआती चुनौतियों को समझने में मदद मिल सकती है।
पलायन रोकने और गांवों को आबाद करने की पहल
आचार्य बालकृष्ण ने उत्तराखंड के गांवों से हो रहे पलायन पर चिंता जताते हुए कहा कि पहाड़ों में रोजगार और आजीविका के साधन विकसित करना जरूरी है। उनके अनुसार, मालागांव में चल रहा ‘मॉडल फार्मिंग’ का प्रयोग किसी सरकारी या कॉरपोरेट परियोजना का हिस्सा नहीं, बल्कि पहाड़ों की कृषि संबंधी संभावनाओं को सामने लाने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज ने योग और आयुर्वेद को दुनिया तक पहुंचाने के लिए निरंतर पुरुषार्थ किया है। इसी तरह पहाड़ के किसानों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए भी निरंतर प्रयास जरूरी हैं।
मालागांव में विकसित किए जा रहे इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी अपनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। फिलहाल यहां मलबा हटाने, लैंटाना की झाड़ियों की सफाई, रास्ते बनाने और पौधों के संरक्षण का काम किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य पहाड़ की जमीन और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर किसानों के लिए खेती के व्यावहारिक और टिकाऊ विकल्प तलाशना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ें और पलायन पर अंकुश लगाने की दिशा में ठोस पहल हो सके।